Covid

COVID Medicines

Covid Medicines, Vaccines

आज मॉर्निंग वॉक में बुजुर्गों का एक समूह हास्य-योग करता मिला। जोरदार ठहाके, कोई मास्क नहीं, कोई डिस्टेन्सिंग नहीं। योग हमारी रगों में इस कदर घुस गया है कि हम यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि यह समय योग (जुड़ाव) का नहीं बल्कि डिस्टेन्सिंग का है। हालांकि मुझे याद है कुछ समय पहले कोई किसी से पुंछ रहा था ‘यदि योग से रोग ठीक होते हैं तो तू दवाइयाँ बनाता ही क्यों है?’

कोविद के लिए दवाइयों का मानसून शुरू हो गया है, जल्द ही वैकसीन्स का भी होगा, हम 8 बजे सुन भी चुके है ‘आपदा ही अवसर है’ और अवसर पर जनहित/ राष्ट्रहित से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सभी दवाइयाँ उसी तरह कारगर होने वाली हैं जैसे सभी धर्म हैं। कोविद में मृत्यु दर 0.3% के आसपास टिक रही है तो 99.7% लोगों का भला तो किया ही जा सकता है, रहे 0.3% तो उन्हें तो आस्था की कमी के कारण मारना ही चाहिए।

अवसर अभी है ‘लूट सके तो लूट, फिर भाव जाएंगे टूट।‘

PS: स्वीडन में बहुत सारे बुजुर्ग इसलिए भी खतम हो गए क्योंकि दर्द और खांसी से निबटने के लिए उनके डॉक्टर ने फोन पर उन्हें पेलियेटिव कॉक्टेल (आराम और शांति प्रदान करने वाली दवाइयाँ) लेने को कहा। साइड इफैक्ट में यह दवाइयाँ सांस को धीमा करती हैं, खून को धीमा करती है (रिलैक्स कर देती हैं), इनसे शांति मिलती है ...कोरोना काल में चिरशांति! किसी को कुछ पता नहीं चलता है: मौत बीमारी से हुई है ...या इलाज़ से। बेड भी खाली हो जाता है, नैक्सट जन का हित करने के लिए।

सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय।

ॐ शान्ति शान्ति